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बुधवार, 9 नवंबर 2011

अजीब जिद है...



अजीब जिद है...
ना  कहने  देते हो,
ना चुप रहने देते हो.
ना ख़ामोशी में आराम,
ना शिकवे में है  सुकून,
आज कह   ही दो 
तुम आखिर मुझसे चाहते क्या हो...

तुम जैसा सनम जिसका
उसे किस ठौर  मिले  चैन,
ना जीने में भला हो और  
ना मरने में भला हो...

अब इस दीवानेपन का
क्या जवाब दे कोई,
जो देखे तो हो  गुनाह ,
ना देखे तो खफा हो...

सीने से लगा लो 
या सूली पे चढ़ा दो... 
हाँ! हो गया है प्यार,
अब  जो चाहे सजा दो.

अनुप्रिया...

14 टिप्‍पणियां:

Ratan Singh Shekhawat ने कहा…

अच्छी प्रस्तुति

Gyan Darpan

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut badhiyaa

Sunil Kumar ने कहा…

यह सब प्यार की निशानी है आपने को संभलिए:):)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

प्यार की दीवानगी को कहती अच्छी रचना ..

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज 10 - 11 - 2011 को आपकी पोस्ट की चर्चा यहाँ भी है .....


...आज के कुछ खास चिट्ठे ...आपकी नज़र .तेताला पर
____________________________________

वन्दना ने कहा…

वाह वाह अन्दाज़-ए-बयाँ बहुत पसन्द आया।

अरूण साथी ने कहा…

nice post.

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

kataaksh aur dard samaitTi sunder abhivyakti.

Pallavi ने कहा…

सीने से लगा लो या सूली पे चढ़ा दो... हाँ! हो गया है प्यार,अब जो चाहे सजा दो.
वाह बहुत खूब ......
समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है

Er. सत्यम शिवम ने कहा…

अनुप्रिया जी...बहुत ही सुंदरता है आपकी लेखनी में....यूँही लिखती रहे...शुभकामनाएं.....बधाई।

Amrita Tanmay ने कहा…

बेहतरीन नज्म के लिए शुक्रिया अनुप्रिया जी.

Rakesh Kumar ने कहा…

अति सुन्दर प्रस्तुति है आपकी.

नववर्ष की आपको बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनाएँ.

समय मिलने पर मेरे ब्लॉग पर आईयेगा.

Shanker Bakshi ने कहा…

सुन्दर सररचना है ।

राकेश कौशिक ने कहा…

वाह-वाह