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बुधवार, 9 नवंबर 2011

अजीब जिद है...



अजीब जिद है...
ना  कहने  देते हो,
ना चुप रहने देते हो.
ना ख़ामोशी में आराम,
ना शिकवे में है  सुकून,
आज कह   ही दो 
तुम आखिर मुझसे चाहते क्या हो...

तुम जैसा सनम जिसका
उसे किस ठौर  मिले  चैन,
ना जीने में भला हो और  
ना मरने में भला हो...

अब इस दीवानेपन का
क्या जवाब दे कोई,
जो देखे तो हो  गुनाह ,
ना देखे तो खफा हो...

सीने से लगा लो 
या सूली पे चढ़ा दो... 
हाँ! हो गया है प्यार,
अब  जो चाहे सजा दो.

अनुप्रिया...