
खामोशियों को ना बेजुबां समझो,
बंद होठों से ये हर नज्म गुनगुनायेंगी,
तुम लब्ज टटोलते रहना ,
ये बात राज की कह जाएँगी.
रंग बदलेगा जब उनके गालों का,
मोहब्बत भी बयां हो जाएगी,
इश्क अल्फाज कहाँ ढूंढेगा,
कयामत जब दिलों पे आएगी.
उलझे जुल्फों से होंगी फरियादें,
कसम नज़रों से उठाई जाएगी,
दर्द रीसेगा धडकनों में जब,
पलक की ओट भींग जाएगी.
छुप के चेहरा निहारेगा कोई...
सादगी में अदा हो जाएगी.
प्यार देगा दिलों पे जब दस्तख,
बिन कहे दास्ताँ हो जाएगी...
अनुप्रिया...