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गुरुवार, 26 अगस्त 2010




ऐ दोस्त मेरे इस दुनिया में
हर चीज़ की कीमत होती है ।
हर ख़ुशी की कीमत होती है
हर गम की कीमत होती है।


कुछ मुफ्त नहीं मिलता है यहाँ
जो मिला चुकाना पड़ता है
जब वक़्त मांगता है हिसाब
तब सर को झुकाना पड़ता है।


जो कुछ भी दिया हमने सबको
हो हर्ष ,प्रेम , विषाद , या ,छल ,
दुगना, तिगुना, चौगुना हो कर
बस वही मिलेगा हमको कल।


जो चाहे कोई छुप जाये कही
इनकार भी कर दे देने से
पर धुंध के करता है हिसाब
ये वक़्त जो आये लेने पे।


हो राजा या हो रंक
समय की एक सी फितरत होती है,
हर कोई सजदा करता है
जिस रोज़ क़यामत होती है।

अनुप्रिया ....

3 टिप्‍पणियां:

हमारीवाणी.कॉम ने कहा…

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ओशो रजनीश ने कहा…

अच्छी कविता है ......
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ओशो रजनीश ने कहा…

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यहाँ भी आइये