
देखते है ख्वाब शायद लोग इसी वहम में,
हसीन इन ख्वाबों में कुछ तो सच्चाई होगी।
जो हो गये हैं बेवफा देखते ही देखते,
उनकी हरक़त में छुपी शायद कोई वफ़ा भी होगी।
आज दिल से निकलेगी देखना कोई प्यारी ग़ज़ल,
क्यों कि आज ही तो जिन्दगी से
मेरे प्यार कि विदाई होगी।
गर आज तुमने यार मेरे मिलने से इनकार किया
कल भला फिर कैसे तुम्हारी मेरी जुदाई होगी।
ये आज कैसे फट पड़ा गुब्बार सीने का,
जरुर आँखों को किसी ने तस्वीर उसकी दिखाई होगी।
इस लिए मैं नाम उसका जुबान पर लाती नहीं,
बेवजह जमाने में मेरे प्यार कि रुसवाई होगी।
आज जल रहा था दिल किसी का मेरी ही तरह,
उसके सीने में भी आग तुम्ही ने लगाईं होगी।
अनुप्रिया...
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